Javascript Required पूछे जाने वाले सवाल-वन एवं वन्य जीव विभाग उत्तर प्रदेश

वन एवं वन्य जीव विभाग,

उत्तर प्रदेश सरकार, भारत

पूछे जाने वाले सवाल

वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 के प्राविधानों के अनुसार 46 जनपदों में (तीन तहसीलों को छोड़कर) व्यक्तिगम कृष्य या अकृष्य जोत पर स्थित 16 वृक्ष प्रजातियों (जिनमें से प्रदेश में प्राकृतिक रूप से मात्र 10 10 वृक्ष प्रजातियाँ पाई जाती हैं) के अतिरिक्त अन्य प्रजातियों के कटान की छूट है अर्थात् इनके कटान हेतु अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। प्रदेश के 24 जिलों व तीन तहसीलों में व्यक्तिगत कृष्य या अकृष्य जोत पर स्थित 27 वृक्ष प्रजातियों के कटान के लिए अनुमति प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है।

वृक्ष पातन या गिरे वृक्षों को हटाने या काटने के लिए आवेदक को भूस्वामित्व (जिसमें वृक्ष स्थित है) प्रमाण सहित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत करना चाहिए।

वृक्ष पातन या गिरे वृक्षों को हटाने या काटने के पात्र व्यक्ति द्वारा वृक्ष काटने/हटाने के लिए आवेदनपत्र सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत करने के 35 दिन के अन्दर सक्षम अधिकारी द्वारा निर्णय की सूचना नहीं दिए जाने पर यह मान लिया जाएगा कि वृक्ष पातन/हटाने की अनुमति दे दी गई है। इस अवधि के पश्चात् आवेदनकर्ता वृक्ष काट/हटा सकता है।


उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को दृष्टि में रखते हुए वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 द्वारा वृक्ष पातन पर प्रतिबन्ध न लगाकर वृक्ष पातन को नियंत्रित किया है। कृषक भाइयों को समय≤ पर प्रदेश में वृक्षारोपण को प्रोत्साहन देने व उन्हें आर्थिक दृष्टि से सबल बनाने हेतु समय≤ पर वृक्ष संरक्षण अधिानियम 1976 का सरलीकरण कर अधिक से अधिक प्रजातियों को इस अधिनियम की परिधि से मुक्त रखा गया है। जैसा कि उत्तर 1 व 2 से स्पष्ट है।

कृषि वानिकी में वृक्ष प्रजातियों का चयन मृदा व वातावरण की उपयुक्तता व उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। पौपलर, यूकेलिप्टस, बबूल, बांस, कदम्ब जैसी प्रजातियाँ कम अवधि में व सागौन, शीशम जैसी प्रजातियाँ लम्बी अवधि में लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से रोपित की जानी चाहिए।


विभिन्न प्रजातियों की पौध उत्तर प्रदेश वन एवं वन्य जीव विभाग की पौधशालाओं में बिक्री हेतु उपलब्ध है। परम्परागत पौधशाला, उच्चतकनीक पौधशाला में व क्लोनल तकनीक से उत्पादित पौधों की दरें भिन्न-भिन्न हैं। पौध क्रय करने हेतु निकटस्थ पौधशाला राजि कार्यालय अथवा प्रभागीय वनाधिकारी से समपर्क कर विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

वृक्षारोपण को प्रोत्साहन देने हेतु उत्तर प्रदेश वन एवं वन्य जीव विभाग द्वारा विभागीय पौधशालाओं में उच्च गुणवत्ता के पौध उचित मूल्य पर उपलब्ध करवाये जाते हैं। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश वन निगम कृषकों की भूमि पर स्थित ‘वृक्ष क्रय योजना’ के अन्तर्गत निर्धारित समर्थन मूल्य पर क्रय करता है। पौधारोपण को बढ़ावा देने हेतु उत्तर प्रदेश वन एवं वन्य जीव विभाग निःशुल्क साहित्य उपलब्ध करवाने के अतिरिक्त ‘तकनीकी सलाह’ उपलब्ध करवानक के साथ मृदा व बीज का परीक्षण कर रोपित की जाने वाली उपयुक्त प्रजाति के सम्बन्ध में सलाह देता है।

शासनादेश संख्या 6222/14-2-98-500(55) 1995 दिनांक 31ण्03ण्99 द्वारा प्रदेश में निवास करने वाले आदिवासियों/वनवासियों को वन सम्पदा को बिना हानि पहुँचाए आरक्षित वन के अन्दर पाये जाने वाली लघु वन उपज आँवला, शहद, गोंद, व मोम निरूशुल्क संग्रहण की सुविधा प्रदान की गई है। उक्त सुविधा केवल उन ग्रामों के निवासियों को प्रदत्त होगी जो वन बन्दोबस्त में अधिकार एवं सुविधा हेतु अधिसूचित किए गए हैं। उक्त निःशुल्क प्रदत्त सुविधा के अन्तर्गत एकत्रीकरण केवल ग्रामवासियों द्वारा किया जाएगा, किसी अन्य बाहरी व्यक्ति द्वारा नहीं।