वन एवं वन्य जीव विभाग,

उत्तर प्रदेश सरकार, भारत

श्री योगी आदित्यनाथ

माननीय मुख्यमंत्री,उत्तर प्रदेश

श्री दारा सिंह चौहान

माननीय मंत्री,वन विभाग

पूछे जाने वाले सवाल

उच्च तकनीक पौधशाला में पौध उच्च गुणवत्ता के होते हैं तथा रोपण के पश्चात् तीव्र गति से बढ़ते हैं। पौधशाला में पौधें की सिंचाई, मिस्टर का प्रयोग कर धुन्ध (उपेज) उत्पन्न कर की जाती है जिससे पानी की बूंदें पत्तियों के ‘स्टोमेटा’ में जाकर ‘स्टोमेटा’ को बन्द कर देती हैं फलस्वरूप पौधों के तने में वृद्धि कम हो जाती है और जड़ों का विकास अधिक होता है। उच्च तकनीक पौधशाला में जड़ों का पर्याप्त विकास होने के कारण रोपित किए जाने पर पौधे पारम्परिक रूप से उत्पादित पौध के सापेक्ष अधिक तीव्र गति से बढ़ते हैं।

जन सामान्य की माँग की पूर्ति हेतु भवन निर्माण के लिए एक बार पर में 10 घन मीटर की सीमा तक इमारती लकड़ी दिए जाने की व्यवस्था है। फुटकर बिक्री की आपूर्ति दर आधार मूल्य का 120 प्रतिशत् निर्धारित है तथा देय कर अलग से देय है। भवन निर्माण प्रकाष्ठ क्रय करने हेतु आवेदक को आवास के स्वीकृत मानचित्र के साथ निकटस्थ प्रभागीय विक्रय प्रबन्धक उत्तर प्रदेश वन निगम के समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत करना चाहिए।

वर्तमान में उत्तर प्रदेश वन निगम द्वारा विभिन्न स्ािलों पर तथा श्मशान घाटों में डिपो खोले गए हैं। प्रत्येक व्यक्ति को राशन कार्ड पर जलौनी व शवदाह हेतु जलौनी दी जाती है। जलौनी लकड़ी का वर्तमान मूल्य रु॰ 60.00 प्रति क्विंटल निर्धारित है।


शासनादेश संख्या 2384/14-4-96-836/92 दिनांक 06.12.1996 से वन्य पशुओं द्वारा मारे या घायल व्यक्तिओं या उनके वारिसों को, वन्य पशुओं द्वारा पसलतू पशुओं के मारे जाने पर एवं जंगली हाथियों द्वारा ग्रामवासियों के मकान व फसल की क्षति की दशा में अनुग्रह आर्थि सहायता प्रदान करने की व्यवस्था है।

प्रदेश के कई अंचलों में नीलगायों (वन रोजो) द्वारा फसल नष्ट करने पर उन्हें मारने/नष्ट करने के लिए शासन द्वारा सम्बन्धित उप जिलाधिकारी एवं खण्ड विकास अधिकारी को अनुज्ञा देने हेतु प्राधिकृत अधिकारी घोषित किया गया है।


इको विकास कार्यक्रम संरक्षित क्षेत्रों के भीतर व निकटवर्ती क्षेत्रों में जैव विवधता संरक्षण सुनिश्चित करने की रणनीति है। इस रणनीति के द्वारा संरक्षित क्षेत्र और समीपवर्ती गाँवों की परिस्थितियों के एक-दूसरे पर पड़ रहे पारस्परिक कुप्रभाव को कम करके लाभदायी प्रभाव को बढ़ाया जाना है। इको विकास कार्यक्रम द्वारा ग्रामीणों को सभी प्रकार के स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का इस प्रकार प्रबन्ध करना कि मौजूदा वैधानिक ़ती है। इको विकास कार्यों के क्रियान्वयन हेतु गैर-सरकारी संस्थाओं (एन.जी.ओ.) का सहयोग लिया जाता है।

संयुक्त वन प्रबन्ध का मुख्य उद्देय वनों के संरक्षण, विकास तथा उत्पादकता में वृद्धि हेतु नियोजन, वन प्रबन्ध तथा वनों से प्राप्त होने वाले लाभों के वितरण में स्थानीय जनता की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना तथा सहभागिता प्राप्त करना है। वर्ष 1997 में उत्तर प्रदेश ग्राम्य संयुक्त वन प्रबन्ध नियमावली प्रख्यापित की जा चुकी है। इस नियमसवली के अनुसार स्थानीय ग्राम वन समिति द्वारा संयुक्त रूप से वन क्षेत्र का माइक्रोप्लान के आधार पर रख-रखाव एवं अग्रेतर विकास किया जाना है। इस योजना में वनों के प्रबन्ध में स्थानीय जनता को निर्णायक भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करना है। विशेषताएँ:

यह अनुभव किया गया कि वनावरण बढ़ाने के लिए वन भूमि के बाहर हर प्रकार की उपलब्ध कृष्य/अकृष्य भुमि यथा परती भूमि, ऊसर, बीहड़, खादर, विभिन्न राजकीय एवं गैर-राजकीय संस्थानों के परिसर व औद्योगिक संस्थानों की रिक्त भूमि में राज्य सरकार के विभाग/उपक्रम/अर्धसरकारी संस्थाओं के कर्मियों, छात्रों व औद्योगिक प्रतिष्ठानों के सदस्यों को पौधारोपण हेतु प्रेरित कर प्रदेश के वृक्षावरण में वृद्धि की जाए। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु वर्ष 2001 में 20 वर्षीय योजना तैयार कर अभियान के रूप में चलाई गई जिसे ”आॅपरेशन ग्रीन“ के नाम से जाना जाता है।

नवाबगंज पक्षी अभयारण्य, नवाबगंज में स्थित है।

जिला उन्नाव, उत्तर प्रदेश।
फोन: 0522 223 9588