Javascript Required वन क्लीयरेंस - वन एवं वन्य जीव विभाग उत्तर प्रदेश

वन एवं वन्य जीव विभाग,

उत्तर प्रदेश सरकार, भारत

वन क्लीयरेंस

वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980

वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 25 अक्टूबर 1980 से प्रभाव में आया था। इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत गैर वानिकी उद्देश्यों के लिए वन भूमि के डायवर्जन के लिए केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक है। राष्ट्रीय हित में और भविष्य की पीढ़ियों के हित में, यह अधिनियम, इसलिए, गैर वानिकी उद्देश्यों के लिए वन भूमि के डायवर्जन को नियंत्रित करता है। अधिनियम का मूल उद्देश्य गैर वानिकी उपयोग के लिए वन भूमि के अंधाधुंध डायवर्जन को विनियमित करना और देश के विकास की जरूरत और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के बीच एक तार्किक संतुलन बनाए रखना है। प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए, देरी कम करने एवं अधिनियम को अधिक उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने के लिए अधिनियम के तहत समय-समय पर निर्देश जारी किये गये हैं।यह सुनिश्चित करने के लिए, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा इस अधिनियम के तहत नियम बनाए गए हैं और 10/01/2003 को अधिसूचित किये गए हैं जिसे बाद में वर्ष 2004 और 2014 में संशोधित किया गया है।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि वन कटान की मंजूरी प्राप्त करने वाले प्रस्ताव समयबद्ध व पारदर्शी तरीके से प्रसंस्कृत किए जाते हैं, वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 के तहत केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन की मांग करने वाले प्रस्तावों की निगरानी और उन्हें ऑनलाइन जमा करने के लिए एक वेब पोर्टल (www.forestclearance.nic.in)की शुरूआत मंत्रालय द्वारा 15 जुलाई 2014 को की गयी है। पोर्टल वन क्लीयरेंस प्रस्तावों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों में परियोजना समर्थकों और आधिकारिक बातचीत हेतु मानव इंटरफ़ेस के लिए की जरूरत को कम करेगा। पोर्टल वन क्लीयरेंस प्रस्तावों की वास्तविक समय की निगरानी में सक्षम बनाएगा जिससे कि केंद्र और राज्य सरकारों में विभिन्न अधिकारियों द्वारा इन प्रस्तावों के प्रसंस्करण के लिए निर्धारित की गई समय लाइन का पालन सुनिश्चित किया जा सके। सभी संबंध में पूर्ण प्रस्तावों को ही स्वीकार करना सुनिश्चित करने के लिए पोर्टल में इनबिल्ट विशेषताएं भी हैं । इस प्रकार वन मंजूरी की मांग करने वाले प्रस्ताव पर राज्य सरकार के संबंधित प्राधिकारी द्वारा स्वीकार किए जाने वाले प्रस्ताव पर, अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करने और तलाशने में बहुमूल्य समय नष्ट नहीं होगा।