वन एवं वन्य जीव विभाग,

उत्तर प्रदेश सरकार, भारत

श्री योगी आदित्यनाथ

माननीय मुख्यमंत्री,उत्तर प्रदेश

श्री दारा सिंह चौहान

माननीय मंत्री,वन विभाग

अवलोकन

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, लगभग सभी साल जंगलों और कुछ शंकुधारी वनों की अत्यधिक कटाई हुई।गंगा के मैदानी इलाकों में वनीकरण के तरीकों से निपटने के लिए 1945 में एक अलग सर्किल बनाया गया।1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, उत्तर प्रदेश वन एवं वन्य जीव विभाग ने अपनी गतिविधियों को बढ़ा दिया; टिहरी, रामपुर और बनारस के जंगलों का 1949 में अधिग्रहण कर लिया गया 1952 में जमींदारी उन्मूलन के साथ लगभग लगभग 9065 वर्ग किलोमीटर (3500 वर्ग मील) जंगल वन एवं वन्य जीव विभाग को हस्तांतरित किये गये।

प्रोपराइटरों द्वारा वनों के क्रमिक विनाश को रोकने के लिए 1948 में, उत्तर प्रदेश में निजी वन अधिनियम लागू किया गया। देश के दीर्घकालिक आवश्यकताओं को पूरा करने और बहुमूल्य वन उत्पादों का अधिक आर्थिक और कुशल उपयोग सुनिश्चित करने के उपायों पर तीसरी पंचवर्षीय योजना (1961-66) में विशेष जोर दिया गया।एक नई केन्द्र प्रायोजित योजना 'त्वरित बढ़ रही प्रजातियों का रोपड़' उत्तर प्रदेश में शुरू की गई जिसके तहत बड़े पैमाने पर यंत्रीकृत वृक्षारोपण कार्यक्रम शुरू किया गया।उत्तर प्रदेश में उपजाऊ भूमि वाले हल्के वनों काट कर गिराया गया और मूल्यवान एवं तेजी से बढ़ने वाली प्रजातियों के पेड़ लगाए गए।

राष्ट्रीय आयोग कृषि की 1976 की रिपोर्ट में ग्रामीण समुदाय के साथ-साथ वन संसाधनों के प्रबंधन में सामाजिक वानिकी के सामाजिक आर्थिक महत्व पर बल दिया गया। परिणाम स्वरूप सामाजिक वानिकी परियोजना वर्ष 1979 में विश्व बैंक की सहायता के साथ शुरू की गयी और 1992 तक जारी रही। कम वन वाले जिलों में विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर विस्तार कर इस परियोजना को लागू किया गया। परिणामस्वरूप विभाग का पुनर्गठन समय-समय पर किया जाता रहा।

उत्तर प्रदेश में वानिकी क्षेत्र के भविष्य के विकास के लिए राज्य सरकार ने विश्व बैंक की सहायता की मांग की। विश्व बैंक द्वारा सहायतित यूपी वानिकी परियोजना वर्ष 1998 में शुरू की गयी। इस रणनीति में इस क्षेत्र के प्रबंधन के तरीकों में परिवर्तन और जंगलों के प्रबंधन में भागीदारी वन प्रबंधन जैसे नए कार्यक्रमों की शुरूआत शामिल है। यह उत्तर प्रदेश वन एवं वन्य जीव विभाग की रणनीति नई सरकार के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक नई प्रक्रियाओं और प्रणालियों कौशल विकसित करने और क्षेत्र में आवश्यक निवेश की अनुमति प्रदान करने के लिए बनायी गयी है।

पहाड़ी जिलों के उत्तरांचल के रूप में एक अलग राज्य बना दिये जाने के बाद, उत्तर प्रदेश में अब काफी हद तक देश के उत्तरी भाग का उपजाऊ गंगा का मैदानी इलाका शामिल है।राज्य से होकर बहने वाली प्रमुख नदियां गंगा, यमुना, रामगंगा, गोमती और घाघरा हैं।इसका भौगोलिक क्षेत्रफल देश के भौगोलिक क्षेत्रफल अर्थात 240,928 वर्ग किलोमीटर का 7.3% है । 199.81 मिलियन की मानव आबादी के साथ, यह देश की सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है जो देश की आबादी का 16.51% है । जनसंख्या 77.73% ग्रामीण और 22.27% शहरी है। औसत जनसंख्या घनत्व 829 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। जनजातीय आबादी नगण्य है। जैसा कि राष्ट्रीय वन नीति 1988 द्वारा आवश्यक है और राज्य वन नीति 1998 के तहत कुल भौगोलिक क्षेत्र का 33% वृक्ष कवर वांछनीय निर्धारित किया गया है अतः इतने क्षेत्र को वनों की न्यूनतम मात्रा निर्धारित किया गया है। तदनुसार भारतीय वन सर्वे द्वारा तैयार की गयी नवीनतम वन रिपोर्ट 2013 में उत्तर प्रदेश के लिए राज्य के वन आवरण के तहत राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का 5.96% और पेड़ कवर के तहत राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का 2.86% आवश्यक बताया गया है।इस प्रकार राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का 8.82% कुल वन / वृक्ष कवर के अंतर्गत है।