Javascript Required रिसर्च विंग - वन एवं वन्य जीव विभाग उत्तर प्रदेश

वन एवं वन्य जीव विभाग,

उत्तर प्रदेश सरकार, भारत

रिसर्च

प्रमुख वन संरक्षक, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान, उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक नियंत्रण एवं दिशा-निर्देशन में प्रदेश में वन अनुसंधान संबंधी कार्यक्रम एवं गतिविधिया संचालित हैं। मुख्य वन संरक्षक, अनुसंधान वृत्त, उततर प्रदेश का मुख्यालय कानपुर में है और वह वन अनुसंधान संस्थान, उ०प्र०, के पदेन निदेशक भी हैं। अनुसंधान वृत्त के अन्तर्गत तीन प्रभाग, साल क्षेत्र (मुख्यालय-बरेली), दक्षिणी क्षेत्र (मुख्यालय-कानपुर) एवं विन्ध्य क्षेत्र (मुख्यालय-रामनगर, वाराणसी प्रदेश के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों मे वन अनुसंधान की प्राथमिकताओं को दृष्टिगत रखते हुए गठित किये गये हैं। वर्तमान में वन संरक्षक स्तर के अधिकारी इन प्रभागों के प्रभारी अधिकारी के रूप में तैनात हैं। तीनों अनुसंधान, प्रभागों के अन्तर्गत कुल 15 अनुसंधान केन्द्र एवं 14 पौधशालायें स्थापित हैं, जिनके माध्यम से अनुसंधान कार्यो का सम्पादन किया जाता है।

वन अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य समस्याग्रस्त क्षेत्र विशेष के लिए वृक्षारोपण तकनीक विकसित करना तथा वनोत्पादकता में वृद्धि एवं वृक्षों के अनुवांशिक सुधार हेतु वृक्ष सुधार कार्यक्रम का विकास करना, ताकि उच्च कोटि की रोपण सामग्री (वानिकी प्रजातियों के बीज एंव पौध) वन प्रभागों को उपलबध करायी जा सके। वो उपलब्ध करायी जा सके। वर्तमान में अनुसंधान गतिविधियों के अन्तर्गत वृक्ष सुधार कार्यक्रम को शीर्ष प्राथमिकता दी जा रही है। अनुसंधान गतिविधियों के सम्पादन के लिए वित्त पेाषण मुख्यतः राज्य आयोजनागत योजना ‘‘ वन संबंधी शोध कार्य एवं प्रसार’से प्राप्त होता है।

वित्तीय वर्ष 2013-14 में वन संबंधी शोध कार्य योजना के अन्तर्गत कुल रु० 48.50 लाख बजट स्वीकृत हुआ है, जिससे एस०पी०ए० की स्थापना, पूर्व स्थापित सी०एस०ओ०, एस०एस०ओ० का अनुरक्षण, सी०पी०टी० वृक्षों का चयन, क्लोनल विधि द्वारा उच्च गुणवत्तायुक्त पौध का उगान, दुर्लभ एवं लुप्त प्राय प्रजातियों का संरक्षण तथा ए०एस०ओ० की स्थापना आदि कार्य कराये गये हैं।

वित्तीय वर्ष 2012-13 में तेरहवें वित्त् आयोग की संस्तुतियों के क्रियान्वयन के अन्तर्गत रु० 27.24 लाख मात्र की धनराशि आवंटित हुई है। इस आवंटित धनराशि से अनुसंधान केन्द्रों का सुदृढीकरण तथा कार्यालय व आवासीय भवनों का अनुरक्षण आदि कार्य कराये गये। वित्तीय सर्ष 2013-14 में इसी योजना के अन्तर्गत कुल रु० 21.87 लाख मात्र की धनराशि आवंटित हुई है।

8 से 12 फिट ऊॅची उच्चगुणवत्तायुक्त पौध उगान हेतु उत्तर प्रदेश वन निगम द्वारा परियोजना स्वीकृत करते हुये वित्तीय वर्ष 2012-13 में कुल रु० 21.24 लाख मात्र की धनराशि वन संरक्षक, वन वर्धनिक, दक्षिणी क्षेत्र, उत्तर प्रदेश, कानपुर को उपलब्ध कराई गई। इस धनराशि के उपयोग से विभिन्न प्रजातियों के 120000 पौधों का उगान किया गया । इस योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2013-14 में रु० 37.42 लाख मात्र की धनराशि अवमुक्त हुई है।

केन्द्र द्वारा पुरोनिधानित "नेशनल बैम्बू मिशन योजना" के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2012-13 में टिशु कल्चर प्राविधि से 10000 पौध उगान कार्य हेतु उत्तर प्रदेश बांस संचालन समिति द्वारा रु० 10.00 लाख की परियोजना स्वीकृत करते हुये रु० 5.00 लाख मात्र की धनराशि प्रथम किश्त के रूप में उपलब्ध करायी गई हैं इस धनराशि से टिशु कल्चर प्रयोगशाला में पौध उगान संबंधी कार्य सम्पादित किये गये।

प्रदेश के विभिन्न वन प्रभागों को उनकी मांग के सापेक्ष चयनित/स्थापित बीज स्त्रोतों से वित्तीय वर्ष 2012-13 में लगभग 214.42 कुन्तल उच्च गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराया गया, जिनमें शीशम, सागौन, खैर, बबूल, विलायती बबूल, कंजी, अर्जुन, चिलबिल तथा यूकेलिप्टस आदि मुख्य प्रजातियां है।

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, देहरादून की सहायता से सामाजिक वानिकी एवं परिस्थितिकीय पुनर्निवेशन केन्द्र (सी०एस०एफ०ई०आर०), इलाहाबाद द्वारा वन अनुसंधान संस्थान, उत्तर प्रदेश, कानपुर में वन विज्ञान केन्द्र की स्थापना की गई है। इस केन्द्र के माध्यम से सी०एस०एफ०ई०आर०, इलाहाबाद द्वारा वानिकी गतविधियों के संबकंध में विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों को जानकारी प्रदान की गई तथा कार्यो के सम्पादन हेतु प्रशिक्षित किया गया।